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विधा को अपनाकर कम खर्च में अधिक फसलोत्पादन प्राप्त करे किसानः राय

जौनपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश राय ने किसानों को कृषि कार्य में अपनायी जाने वाली आईपीएम विधा (एकीकृत नाशी जीव प्रबन्धन) के विषय में जानकारी देते हुये बताया कि इस विधा को अपनाकर कम खर्च में अधिक फसलोत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। गर्मी की जुताई व मेड़ों की छंटाई करके उसमें मौजूद कीटों की अवस्थाओं को नष्ट कर दें जिससे ग्रास हापर, बाल काटने वाले कीट सहित पत्ती काटने वाले कीटों की संख्या बहुत कम हो जाती है। खेतों की मेड़ों की साफ-सफाई करें तथा निराई-गुड़ाई करके खर-पतवारों को निकालते रहे जिससे हरा, सफेद एवं भूरे फुदके तथा गंधी कीट को नियंत्रित करने में सहयोग मिले। भूरा फुदका व बाल काटने वाले कीट को नियंत्रित करने के लिये प्रत्येक 20 कतार के पश्चात एक कतार छोड़कर रोपाई करें। समय से रोपाई करने से गालमिज, बाल काटने वाले कीट का प्रकोप कम होता है। संस्तुत/संतुलित उर्वरकों के प्रयोग से तना बेधक, पत्ती लपेटक कीट व भूरा फुदका एवम् गालमिज का प्रकोप कम होता है। उचित जल प्रबन्धन करने से गोभ गिडार, भूरा व सफेद फुदका कम लगता है। कीटरोधी प्रजातियों जैसे पन्त-12, पन्त-24, आई.आर.-36 पूसा बासमती, स्वर्णा सब-1 आदि की खेती करने से तनावेधक कीट का प्रकोप कम होता है। खेतों से अण्डों, सूड़ियों  को एकत्र कर नष्ट कर दें तथा कीट/रोग ग्रसित पौधों को एकत्र कर नष्ट कर दें। समय-समय पर खेतों के मेड़ों की साफ-सफाई करें तथा निराई-गुड़ाई करके खर-पतवारों को निकालते रहे जिससे कीटों के अण्डे व सूड़ियों का विकास न हो सके। लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, येलो टैªप, बर्ड परचर के माध्यम से हानिकारक कीटों को नष्ट करें, आर्थिक क्षति स्तर पार करने पर उपयुक्त रसायनों का प्रयोग करें।

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