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रामलीला हुसेनाबादः भरत का विलाप देखकर गमगीन हुये श्रोतागण

जौनपुर। रामलीला समिति हुसेनाबाद द्वारा बीती रात भरत आगमन, भरत मनावन व नक्कटैया का मंचन किया गया। पहले दृश्य में भरत ननिहाल से अयोध्या पहुंचते हैं। यहां उनको मालूम होता है कि मुझे अयोध्या का राजा बनाने के लिये माता कैकेई ने राम लक्ष्मण को वनवास भेज दिया है। इसी गम में पिता राजा दशरथ का स्वर्गवास हो गया तो भरत का विलाप व प्रतिक्रिया देखकर दर्शक गमगीन हो गये। उसके बाद भरत व शत्रुघन पूरे परिवार के साथ राम को मनाने के लिये जंगल जाते हैं लेकिन भरत के लाख मनाने के बाद भी राम वापस नहीं लौटते हैं। तब भरत भाई राम की खड़ाऊ लेकर वापस अयोध्या लौट आते हैं। तीसरे  दृश्य में सुपुर्णखा राम-लक्ष्मण को देखकर सम्मोहित हो जाती है। वह दोनों भाइयों को रिझाने के लिये सुन्दरी का रूप धारण करके दोनों राजकुमार के पास जाती है। पहले राम से शादी करने की बात करती है। राम ने उसे बताया कि मैं तो शादीशुदा हूं। उसके बाद लक्ष्मण को सम्मोहित करने के लिये नाच-गाकर खूब रिझाती है। इसके बाद भी वह सफल नहीं हुई तो उसने सीता को खा जाने के लिये असली रूप धारण करके दौड़ती। उसका मंसूबा भांप करके लक्ष्मण ने उसकी नाक-कान काट दिया। सुपुर्णखा का नाक कटते ही पूरा पण्डाल जयश्रीराम के नारों से गूंज उठा। राम शिवम उपाध्याय, लक्ष्मण शुभम उपाध्याय, भरत गंगन तिवारी, शत्रुघन रिशू श्रीवास्तव बने तो सीता की भूमिका उत्कर्ष मिश्रा व सुपुर्णखा की भूमिका गोलू रावत ने निभायी। इसके पहले रामलीला की शुरूआत अध्यक्ष संतोष शुक्ला द्वारा राम, लक्ष्मण व सीता की आरती से हुई। मंच का संचालन प्रबंधक अमित श्रीवास्तव ने किया।

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