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लोक संगीत समारोह में गूंजी चैता, चहका व चैताल

जौनपुर। सुरूचिपूर्ण लोक संगीत के संरक्षण के लिये बक्शा क्षेत्र के चुरावनपुर गांव में श्री द्वारिकाधीश लोक संस्कृति एवं वानस्पतिकी विकास संस्थान द्वारा लोक संगीत समारोह का आयोजन हुआ। देर रात तक चले इस फागुनी धमाल में श्रोता खूब आनन्द लिये। पिछले 5 दशक से अनवरत जनपद के लोक कलाकारों को मंच प्रदान करता आ रहा यह संस्थान विलुप्त हो रहे जनपद की फाग गीतों फगुआ, चैताल, चहका, धमार, उलारा, बेलवइया, चैता आदि अवधी लोक गीतों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सक्रिय है। फागुनी गीतों के विविध गायन में श्रीपति उपाध्याय, लोक गायक प्रज्ञा चक्षु बजरंगी सिंह, सत्यनाथ पाण्डेय, झीनू दूबे, राम आसरे तिवारी, गुलाम अली, भुट्टे अली, कैलाश शुक्ल, नजरू उस्ताद, लक्ष्मी उपाध्याय, कृष्णानन्द उपाध्याय आदि ने फागुनी गीतों को सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस मौके पर आये सभी का स्वागत करते हुये संस्थान के अध्यक्ष डा. मनोज मिश्र ने कहा कि आज होली के नाम पर परम्परागत लोक गीतों के स्थान पर अश्लील गीतों का प्रदर्शन हो रहा है। संस्थान का प्रयास है कि यह परम्परा विलुप्त न होने पाये। साथ ही सभी गायकों को रविशंकर मिश्र एवं डा. सुभाष चन्द्र शुक्ल द्वारा सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन श्रीपति उपाध्याय ने किया। अन्त में ओमकार मिश्र ने सभी के प्रति आभार जताया।

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