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लखनऊ मेट्रों गंगा जमुनी तहजीब का आईना : सिराज मेंहदी

मेट्रो लखनऊ के माथे पर कोहनूर: मंजर भोपाली


मेट्रो के सफर में मुशायरा व कवि सम्मेलन

लखनऊ। डेढ़ सौ सालों में लखनऊ की सवारी भले इक्के व तांगे से मेट्रों तक पहुंच गयी है लेकिन इतने समय की तहजीब आज भी बाकी और यह तहजीब आज लखनऊ मेट्रो में देखने को तब मिली जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हाजी सिराज मेंहदी और मेंगो ग्रोवर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंसराम अली ने होली के उपलक्ष्य में लखनऊ मेट्रो में मुशायरा व कवि सम्मेलन आयोजित करवा दिया।

इस मुशायरे व कवि सम्मेलन में जहां शायरों ने अपने कलाम से मुसाफिरों को गंगा जमुनी तहजीब  की झलक दिखाई तो वही कवियों ने गर्मी के आगमन पर होली का खुमार बांधा। लखनऊ यूनिवॢसटी के मेट्रो स्टेशन से मुशायरे का सफर अमौसी मेट्रो स्टेशन और फिर वहां से  वापसी पर यूनिवर्सिटी स्टेशन पर कब खत्म हो गया किसी को पता ही नहीं चला। मुशायरे व कवि सम्मेलन के इस सफर में ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के साथ हाजी सिराज 


मेंहदी, इंसराम अली, शायर मंजर भोपाली, शायरा नसीम निकखत, सैयद वकार रिजवी, नदीम अशरफ जायसी, हसन काजमी, 

डा.हारुन रशीद, अमिता वर्मा, तारिक सिद्दीकी, अरमान मलिक,अमिता वर्मा, सर्वेश अस्थाना, प्रदीप कपूर, चच्चा अमीर हैैदर एडवोकेट वगैरह थे। हाजी सिराज मेंहदी ने मेट्रों के अधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इनके सहयोग के बगैर यह खुशगवार मुशायरा नहीं हो पाता। कहा कि यह मेट्रो लखनऊ की तहजीब का आईना है। कहा कि इस सफर को शायरों, कवियों पत्रकारों व सामाजिक कार्यकत्र्ताओं ने यादगार बना दिया। मौलाना खालिद रशीद फंरगी महली ने कहा कि लखनऊ मेट्रों के संचालन के लिए मैं इसके प्रबंधकों को मुबारकबाद देता हूं और आज हाजी सिराज मेंहदी और इंसराम अली की वजह से एक शानदार सफर का लुत्फ उठाने का मौका मिला जिसमें शेरो व शायरी की महफिल भी जमी। उन्होंने लखनऊ के शहरियों को होली की मुबारकबाद देते हुए उनसे अपील की कि वह ज्यादा से ज्यादा मेट्रों का सफर करें ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो सके इसकी सफाई का भी खासतौर से ख्याल रखे। मंजर भोपाली ने कहा कि लखनऊ के 

माथे पर मेट्रो कोहनूर की तरह है। इसकी हिफाजत की जिम्मेदारी लखनऊ के लोगों की है।कहा कि 

लखनऊ की मेट्रो सबसे खुबसूरत मेट्रो है और इसमें अंंग्रेजी और हिंदी केे साथ उर्दू में भी मेट्रो स्टेशन के नाम लिखे हैै। इस मौकेे पर अमौसी स्टेशन पर मंजर भोपाली की किताब तावीज का विमोचन भी हुआ। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवॢसटी ओल्ड ब्याज एसोसियेशन लखनऊ के अध्यक्ष तारिक सिद्दीकी और निकहत खान ने होली की मुबारकबाद देते हुए कहा कि आज का यह यादगारी सफर रहा। रंगों की होली के बाद आज शेरों शायरी की होली मनायी जा रही है जो बहुत खूबसुरत है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सर्वेश अस्थाना ने कहा कि मेट्रों के इतिहास में यह पहला मौका है कि शायरों , कवियों, पत्रकारों व सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के इतने बड़े कांरवा ने सफर किया।

रास्ते भर शायरों व कवियों ने अपने कलाम व रचनाओं से मुसाफिरों को झूमने पर मजबूर कर दिया और वह इसका लुत्फ उठाते रहे।

मुशायरे में मंजर भोपाली ने यह

 शेर पढ़ कर वाह वाही लूटी  

एक नया मोढ़ देते हुए फिर फसाना बदल दीजिये

या तो खुद बदल जाइये या


 जमाना बदल दीजिये

मुझ को पाला था जिस पेड़ ने इसके पत्ते ही दुश्मन हुए

कह रही है कई डालिया आशियाना बदल दीजिये।

नसीम निखत ने यह शेर पढ़ा

हमारे चेहरे के दागों पर तंज कसते हो, हमारे पास भी आईना है दिखाये क्या। हसन काजमी नेकहा कि खुबसूरत है तेरी आंखे रैातों को जागना छोड़ दे खुद नींद आ जायेगी मुझे सोचना छोड़ दे।

डा.हारुन रशीद ने यह शेर पढ़ा

चिराग हम ने जलाये के तैरगी कम हो

कह दो दिल भी जला दें जो रोशनी कम हो

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