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करोड़ों का घोटाला: कागजों में तालाब, तालाबों में गंदगी


मथुरा। प्रधानमंत्री जनपद में जिला प्रशासन द्वारा एक हजार से अधिक कुण्ड तालाबों की खुदाई में करोड़ों के घोटाले का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। द बृज फाउण्डेशन जहां इस घोटाले के लिये बृज तीर्थ विकास परिषद को जिम्मेदार ठहरा रहा है वहीं दूसरी तरफ परिषद के शैलजा कान्त मिश्र तालाबों की खुदाई योजना से साफ इंकार कर रहे हैं। इस घोटाले में कौन पाक साफ है और कौन घोटालेबाज है जब इसकी जांच पड़ताल की गई तो खोदे गये तालाब जमीनी धरातल पर घोटाले की पेाल खोलते नजर आये।
प्रधानमंत्री की जल संचयशक्ति योजना एवं स्वच्छता अभियान का सच उजागर करते छाता क्षेत्र का रानेरा का तालाब जिसे ग्रामीणों ने गोबर एवं उपलों से भर कर ढ़क दिया है।

द बृज फाण्डेशन के चेयरमैन एवं वरिष्ट पत्रकार विनीत नारायण ने गत दिवस जनपद में प्रधानमंत्री की जल संजय योजना के अन्तगर्त एक हजार से अधिक कुण्ड तालाबों की खुदाई में करोड़ों के घोटाले का आरोप बृज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कान्त मिश्र एवं सीईओ नागेन्द्र प्रताप पर लगाया था। जिसमें शैलजाकान्त मिश्र ने जहां तालाब खुदाई योजना से बृज तीर्थ विकास परिषद का कोई लेना-देना नहीं होना बताया बल्कि सभी आरोपों को भी निराधार बताया बल्कि उनके बचाव में जिला विकास अधिकारी रवि किशोर त्रिवेदी को भी मैदान में उतरना पड़ा जिन्होंने जनपद में 1046 तालाबों का जीणोद्धार होना बताया जिसमें 2019-20 वर्ष में मनरेगा के तहत 509 एवं चैदहवें वित्त आयोग की धनराशि से 537 तालाबों का जीर्णोद्धार/सुद्धठीकरण होना बताया गया। जिनकी जियो टैगिंग भी किया जाना बताया गया। ये कार्य जनपद की 10 ब्लाक की 515 में ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा भी किया जाना बताया गया।
जिला विकास अधिकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों में पूर्व से स्थित तालाबों का ग्राम विकास विभाग राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के अन्तगर्त तथा पंचायती राज विभाग की चैदहवें वित्त आयोग की धनराशि से फरह 115, मथुरा 96, बल्देव 171, राया 161, मांट 68, नौहझील 64, नन्दगांव 76, छाता 89, चैमुहां 82, गोवर्धन ब्लाक में 94 तालाबों का जीर्णोद्धार होना तो बताया गया है लेकिन इन तालाबों पर कितनी राशि खर्च की गई इसका खुलासा नहीं किया गया। इस सम्बंध में ‘‘विषबाण’’ टीम द्वारा जांच पड़ताल करने का प्रयास किया तो बताया गया कि तालाब सम्बंधित डाटा डीपीडीपी नाम की सरकारी बेबसाइट पर हैं। लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी डाटा उपलब्ध नहीं हो सका। छाता क्षेत्र के गांव रान्हेरा में तालाबों के जीर्णेाद्धार का सच देखा गया तो ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 6 से अधिक तालाब हैं जिसमें से दो तालाबों की खुदाई कुछ वर्षों पूर्व कराई गई थी लेकिन गांव के गन्दे पानी के अलावा एक बून्द पानी कभी नहीं भरवाया गया।
नौहझील में लाखों की लागत से हुई झीलों की खुदाई को 11 जून 2019 को तपती दोपहरी में देखते हुए बृज विकास तीर्थ परिषद के उपाध्यक्ष शैजलाकान्त मिश्र एवं सीईओ नागेन्द्र प्रताप सिंह जो अब सफाई दे रहे हैं कि तालाबों के जीर्णोद्धार से अब कोई लेना देना नहीं है। 

ग्रामीणों ने सड़क किनारे बने तालाब को देखते हुए कहा कि इस तालाब को ग्रामीणों ने कूड़े कचरे से भर दिया है साथ ही गन्दा पानी जाने से बीमारियां फैलती रहती हैं। जिसकी कई वर्षों से आजतक ना तो कभी सफाई कराई गई और न ही खुदाई कराई गई। इसी तरह कभी जनपद की शान रही नौहझील की नौ झीलों को कब्जा धारियों के कब्जे से मुक्त कराकर उनकी खुदाई कराई गई जिस पर लाखों की राशि ग्राम पंचायत द्वारा खर्च की गई। जिसका मौका मुआयना करते हुए बृज तीर्थ मिश्रा, सीईओ नागेन्द्र प्रताप ने कहा था कि फिर से झीलों को चमकाया जायेगा और पुनः देश में यह पर्यटन का केन्द्र बनेगी। लेकिन खुदाई के बाद भी ब्लाॅक पर कोई अधिकारी कर्मचारी कुछ भी करने को तैयार नहीं हुआ।
विकास की पटकथा लिखने वाला खण्ड विकास कार्यालय नौहझील जहां ना अफसर दिखाई देते हैं न कर्मचारी फिर भी लिख जाती है करोड़ों के विकास की कहानी।

मांट ब्लाक की मावली ग्राम पंचायत में भी दो तालाबों की खुदाई पर चार लाख से अधिक की राशि ग्राम प्रधान द्वारा खर्च होना बताया गया। लेकिन तालाबों का पानी कहां गया। ये कोई बताने को तैयार नहीं हुआ। तालाब घोटाले में खास बात तो ये है कि ज्यादातर तालाबों की खुदाई कागजों में की गई है जिनकी थोड़ी बहुत खुदाई की भी गई तो उसका कार्य मनरेगा मजदूरों की जगह जेसीबी से कराकर लाखों का भुगता

न मजदूरों के नाम पर दर्शाकर निकाल लिया गया। बृज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैजलाकान्त मिश्र जहां तालाब जीर्णोद्धार के घोटाले से अपना कोई लेना-देना नहीं बता रहे हैं लेकिन सवाल ये है कि जब उनका कोई लेना-देना नहीं था तो कस्ब मांट में तालाब जीर्णोद्धार में क्यों उपस्थित रहे बल्कि नौहझील में झीलों की खुदाइ्र का स्वयं अवलोकन उसके विकास की घोषण की थी। इस सम्बंध में ‘‘विषबाण’’ द्वारा शैजला कान्त मिश्र से विनीत नारायण के आरोपों के सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कुण्डों की खुदाई की कोई योजना ना तो बृज तीर्थ विकास परिषद ने बनाई है और न ही किसी तालाब की खुदाई कराई है, नौहझील की झीलों की खुदाई को देखने गया था लेकिन उनके द्वारा इस सम्बन्ध में घोषणा की गई थी। उनका तालाब जीर्णोद्धार एवं सुद्धीकरण से कोई लेना-देना नहीं है।

दूसरी तरफ दा बृज फाण्डेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण ने कहा कि प्रशासन को जिन कुण्डों का जीर्णोद्धार कराया है उनकी सूची खर्च सहित जारी करनी चाहिये उन्होंने कहा कि बृजतीर्थ विकास परिषद का गठन ही बृज के सर्वागीण विकास और सरकार द्वारा विकास कार्यों को सही ढ़ंग से अमली जामा पहनाने के लिये किया गया था जिस पर सरकार प्रति माह लाखों की रकम खर्च कर रही है। श्रीनारायण का कहना है कि प्रधानमंत्री ‘‘जल शक्ति अभियान’’ को भ्रष्टाचार की भैंट चढ़ा दिया गया है। जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिये। दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि दा बृज फाउण्डेशन द्वारा कुण्ड तालाबों के जीर्णोद्धार पर उंगली उठाये जाने के बाद तालाब घोटाले का जिन्न बाहर निकलता दिखाई दे रहा है जिसकी शिकायतें पीएमओ कार्यालय से लेकर लखनऊ तक हो रही हैं। जिससे कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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