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पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्याग दिया प्राण


शाहगंज जौनपुर। स्थानीय रामलीला के तत्वावधान में लीला मंचन के चौथे दिन मंगलवार की शाम नगर के गांधी नगर कलेकतरगंज स्थित मंच पर कलाकारों द्वारा सुमंत अयोध्या आगमन, राजा दशरथ विलाप और राजा दशरथ महाप्रयाण की लीला प्रस्तुत की गई। इस दौरान भारी संख्या में उपस्थित रामभक्त मंत्रमुग्द हो उठे। दरभंगा से आई मंडली द्वारा प्रस्तुत लीलांस के अनुसार पुत्र राम, लक्ष्मण और पुत्रवधु सीता को वन गए पांच दिन बीत चुके थे। राजा दशरथ की आंखें राजमार्ग के सुने पथ पर टिकी थी। तभी आर्य सुमंत गुरू वशिष्ठ के साथ अयोध्या पहुंचे।
राजा दशरथ ने पूछा कि सुमंत मेरे राम को नहीं लाए। राजा दशरथ की ऐसी मनोव्यथा देख गुरु वशिष्ठ ने उन्हें समझाया, हे राजन, सुमंत अकेले नहीं रघुवंश के सत्य, धर्म और वचन पालन का गौरव लेकर आए हैं। यदि रथ खाली न आता तो धर्मचक्र की धुरी रसातल में धंस जाती। महारानी कौसल्या ने कहा कि राम वियोग के अथाह सागर में अयोध्या की नौका डोल रही है, स्वामी आप कर्णधार हैं, धीरज रखिए। अंततोगत्वा पुत्र वियोग में तड़प रहे राजा दशरथ को श्रवण कुमार के अंधे पिता द्वारा दिए गए पुत्र वियोग में मृत्यु के श्राप की स्मृति स्पष्ट हुई। राजा जमीन पर गिर पड़े और राम राम कहते अपने प्राण त्याग दिए। इस दौरान श्रोतागण भाव विभोर हो उठे और प्रभु राम के जयकारा करने लगे।

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