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गैंगस्टर एक्ट के मामले में आरोपित दो भाइयों हरिश्चंद्र उर्फ पिटू तथा सुभाष उर्फ डब्लू को अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार यादव की अदालत ने दस वर्ष कारावास एवं 5000 रुपये जुर्माना की सजा सुना

जौनपुर। सिकरारा थाना क्षेत्र के गैंगस्टर एक्ट के मामले में आरोपित दो भाइयों हरिश्चंद्र उर्फ पिटू तथा सुभाष उर्फ डब्लू को अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार यादव की अदालत ने दस वर्ष कारावास एवं 5000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। मासूम बच्चे के अपहरण व हत्या के बाद आरोपितों पर गैंगस्टर की धारा लगाई गई थी। मामले में नवजोत सिंह सिद्धू के प्रकरण में हुए निर्णय का हवाला दिया गया। 

 अभियोजन के अनुसार 25 जनवरी 2012 को थानाध्यक्ष सिकरारा राजकुमार सिंह हमराहियों के साथ क्षेत्र में मौजूद थे। अभिलेखों से पता चाल कि हरिश्चंद्र निवासी सिउरा सिकरारा का सुसंगठित आपराधिक गिरोह है। इस गिरोह के सक्रिय सदस्य हरिशचंद का भाई सुभाष है। गैंग लीडर हरिश्चंद्र है। यह समाज विरोधी क्रियाकलाप में अभ्यस्त हैं, इससे आम जनता में भय एवं आतंक का माहौल व्याप्त है। इनके खिलाफ कोई पुलिस को सूचना देने का साहस नहीं करता। दो अप्रैल 2011 को प्रतिमा मिश्रा ने प्राथमिकी दर्ज कराई कि भूमि विवाद को लेकर गांव के हरिश्चंद्र व सुभाष उसके सात वर्षीय पुत्र प्रियांशु का स्कूल जाते समय अपहरण कर ले गए। बच्चे के शव की बरामदगी एक कुएं से हुई। इस मामले में आरोपियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया। अपील विचाराधीन है। आरोपितों के आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए गैंगस्टर ऐड की प्राथमिकी दर्ज हुई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। सरकारी अधिवक्ता राम प्रकाश सिंह व हरिश्चंद्र सिंह ने गवाहों को पेश किया। नवजोत सिंह सिद्धू बनाम पंजाब राज्य में सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था का हवाला दिया गया। जिसमें दोषसिद्धि पर स्थगन न प्रदान होने की दशा में आरोपित की दोषसिद्धि मानी जाएगी। कोर्ट ने समस्त साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद आरोपित हरिश्चंद्र व सुभाष को गैंगस्टर एक्ट में दोषी पाते हुए दंडित किया।

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