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माता, पिता, गुरू व प्रभु की सेवावन्दन अवश्य करनी चाहियेः वशिष्ठ नारायण

जौनपुर। माता, पिता, गुरू और प्रभु का कभी अनादर न होने पाये। अनादर करने वाला नरक में जाता है। इनकी हमेशा सेवा वन्दन के साथ सेवा करनी चाहिये। उक्त विचार महराजगंज क्षेत्र के बासूपुर कैलवल में चल रही रामकथा के दूसरे दिन वाराणसी नगरी से पधारे वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने रामचरितमानस की चर्चा करते हुये भरत की सराहना किया। इसके पहले रामकथा के पहले दिन आजमगढ़ से पधारे बाल गोविन्द शास्त्री ने आज के समाज को जमकर कोसा। साथ ही उठने, बैठने, कथा सुनने तक के लोगों को सिस्टम बताया। इसी क्रम में उन्होंने रावण के नकली साधु बनकर सीताहरण पर चरचा किया। इस अवसर पर तमाम लोगों की उपस्थिति रही।

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