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डाक्टरों ने जिलाधिकारी को सौपा पत्रक जताया विरोध 

जौनपुर प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा दशाओं तथा चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार द्वारा तमाम गुणवत्ता पूर्ण  उपाय किए जा रहे हैं लेकिन सरकारी चिकित्सकों के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने से नाराज चिकित्सकों ने आज जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नाम पत्रक  सौंपकर अपनी समस्याओं के बारे में अवगत कराया | 

चिकित्सकों का कहना है कि राज्य की 22 करोड़ से अधिक जनसंख्या को चिकित्सा स्वास्थ्य की सेवाएं सुचारू रूप से प्रदान करने में राजकीय चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी उपलब्ध संसाधनों में अधिक कार्य कर रहे हैं और विभिन्न परिस्थितियों में दिन रात काम करते हैं यहां तक कि राजपत्रित अवकाश के दिनों में भी हम बिना किसी अतिरिक्त राशि के 24 घंटे काम कर रहे हैं बावजूद इसके प्रशासन द्वारा हमारी पीड़ा को संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है हमारी मांग है कि सरकारी क्षेत्र की चिकित्सा सेवाओं के महत्व पर बल देते हुए इसकी सेवा दशाओं को सर्वोत्तम बनाने का प्रयास करें सरकार की मंशा के विपरीत कतिपय स्तरों पर शिथिलता और संवेदनशीलता के चलते डॉक्टरों के प्रति स्वेच्छा चरिता और उपेक्षा का भाव निरंतर दिख रहा है ।जिससे राजकीय सेवाओं में चिकित्सकों में निराशा और कुंठा का भाव  है डॉक्टरों ने प्रोन्नति सहित अन्य लंबित मामलों तथा सातवें वेतन आयोग के क्रम में प्रैक्टिस बंदी सहित अन्य भत्तों को अभी तक प्रदान की जाने पर भी चिंता जताई साथ ही चिकित्सकों का कहना है कि सरकार द्वारा मनमाने ढंग से सेवानिवृत्ति की  आयु बढ़ा दिए जाने ही गलत है दोहरी व्यवस्था के तहत चिकित्सा इकाइयों में ढाई लाख रुपए तक प्रतिमाह वेतन पर चिकित्सक वेडिंग के माध्यम से मात्र 8 घंटे के लिए नियुयक्त  किये  जा रहे हैं और उनसे मेडिकोलीगल पोस्टमार्टम आदि से कार्य नहीं कराए जा रहे हैं जो नियम के खिलाफ है जबकि लोक सेवा आयोग से चयनित चिकित्सा अधिकारियों को मात्र 60 से 70 हजार  वेतन  प्रदान किया जाता है राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम कराते हैं यदि सरकार हमारी मांगे नहीं मानती है तो हम लोग 1 अक्टूबर से बाह में काला फीता बांधकर सेवाएं प्रदान करेंगे।

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