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पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने की उरी के शहीद राजेश सिंह की उपेक्षा

जौनपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस साल सभी विश्वविद्यालयों को आदेश दिया है कि वे सर्जिकल स्ट्राइक डे का आयोजन करके गोष्ठी आयोजित किया जाय। साथ ही शहीदों के बारे में लोगों को जानकारी दिया जाय। इस आदेश का पालन करते हुये वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने अपना कोरम भी पूरा कर दिया लेकिन पूविवि के बगल के ही निवासी अमर शहीद राजेश सिंह के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालने की बात तो दूर, उनके परिजनों तक को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। बता दें कि 2 वर्ष पूर्व अपने देश की सेना के जांबाज कमाण्डो ने अपनी जान की परवाह न करते हुये पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के कैम्प को तहस-नहस कर दिया था। इतना ही नहीं, काफी संख्या में आतंकवादियों को मौत के घाट भी उतार दिया था। उस ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को करके सेना ने 18 सितम्बर 2016 को कश्मीर के उरी में 19 जवानों की शहादत का बदला लिया था। उरी की आतंकी घटना में जौनपुर के करंजाकला क्षेत्र के भकुरा गांव निवासी राजेन्द्र सिंह का पुत्र राजेश सिंह भी शहीद हुआ है। यह संयोग ही है कि भकुरा गांव वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की सीमा से सटा हुआ है। लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश यादव, जफराबाद विधायक डा. हरेन्द्र प्रताप सिंह के अलावा किसी भी जनप्रतिनिधि ने शहीद के गांव जाना तो दूर, उनके परिवार की पीड़ा का निस्तारण करना भी उचित नहीं समझा। बता दें कि एक वर्ष के भीतर महामहिम राज्यपाल राम नाईक और उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा दो-दो बार तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार विश्वविद्यालय में आ चुके हैं। किसी ने भी उस शहीद का नाम लेना उचित नहीं समझा। फिलहाल इसे जनपद के भाजपा नेताओं की कमी कही जाय या पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामी। उरी के शहीद राजेश सिंह के प्रथम शहादत दिवस पर इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. एनके सिंह की टीम ने 2.51 लाख रूपये की सहायता शहीद के पिता को दिया। साथ ही दूसरे शहादत दिवस पर समाजसेवी व उद्योगपति अशोक सिंह ने शहीद की स्मृति में स्मारक स्थल बनवाने की घोषणा किया जबकि शासन व प्रशासन की लापरवाही के चलते स्मृति द्वार अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है।

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