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पापी व्यक्ति भी श्रीमदभागवत महापुराण श्रवण से हो जाता है पावनः अंकितानन्द महाराज

जौनपुर। जिस प्रेत की मुक्ति गया श्राद्ध से नहीं होती, उसकी मुक्ति श्रीमदभागवत महापुराण के श्रवण से संभव है। पापी व्यक्ति भी श्रीमदभागवत महापुराण के श्रवण से पावन हो जाता है। यहां तक कि प्रेत योनि से भी छूट सकता है। उक्त उद्गार सिद्धपीठ श्री महाकाली जी मंदिर के प्रांगण में स्व. शंकर लाल जायसवाल की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन श्रद्धालुओं के बीच वृंदावन से पधारे कथा व्यास स्वामी अंकित आनन्द महाराज ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिला है। यह साधन का धाम व मोक्ष का द्वार है। जीव सत्कर्म करके नर से नारायण हो सकता है। गंगा दो हैं। एक गंगा जो विष्णु भगवान के चरण से निकली हैं और दूसरी गंगा कथा व्यास के श्रीमुख से निकली हैं। गंगा में स्नान करने से तन पवित्र होता है। भागवत रूपी गंगा में स्नान करने से मन पवित्र होता है। यह कथा मरने के बाद भी तार देती है। कथा ज्ञान यज्ञ के आयोजक अनिल जायसवाल व मुख्य यजमान विमला जायसवाल हैं। इस अवसर पर सुनील जायसवाल, कृष्णा जायसवाल, गाना जायसवाल, मनोज कुमार, कृष्ण गोपाल जायसवाल सहित तमाम श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

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