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पुलवाम के आवंती इलाके में शहीद जवानों के हक़ में मुस्लिमों ने माँगी दुआ

(बाबर)
जलालपुर, जौनपुर -किसी भी देश की रक्षा - सुरक्षा की जिम्मेरदारी वीर
जवानों की होती है | देश का हर नागरिक अम्न और चैन की नींद इसलिए सोता है
की देश के जवान दिन - रात सरहदों की निगरानी करते हैं और अपनी जान को
जोखिम में डाल कर गोलियों के साये में ठंड , गर्मी ,बर्फ़बारी , आंधी और
तूफानों के साथ -साथ दुश्मनों से भी जंग लड़ते रहते हैं | बावजूद इसके वह
कभी -कभी कायराना हमलों का शिकार होजाते हैं | कुछ ऐसा ही कायराना हमला
१४ फरवरी को पुलवामा के आवंती इलाके में आतंकियों ने लग भाग ४० से अधिक
जवानों को शहीद कर अपनी नापाक हरकतों को अंजाम दिया
| जवानों की शहादत पर
आज जलालपुर क्षेत्र के जलालपुर कस्बा ,रेहटी  ,तरलोचन , कुर्सियां ,
मझगवां कलां , जरहिला कला , कोठवा, ओइना , घुरहूपुर ,परेंव ,असबारनपुर
कजगांव  सहित अनेक गावों की जुमा मस्जिदों में उल्माएदीं ने अपनी तकरीरों
में देश के जवानों पर हुए आतंकियों के कायराना हमले की मुखालफत करते हुए
शहीद हुए जवानों के हक़ में दुआ ख्वानी की और अल्लाह की बारगाह में उनके
परिजनों को सब्र करने की तौफीक के लिए आजिजी और मिन्नत की | उल्माए दीन
ने अपनी तक़रीर में कहा की हम सब शहीद हुए वीर जवानों के परिजनों के लिए
इस संकट की बेला में कंधे से कंधा मिला कर खड़े हैं और इसप्रकार के
कायराना आतंकी हमले की घोर निंदा करते है | मुस्लिमों ने यह मांग सरकार
से की कि शहीदों की शहादत के एक - एक बूँद खून की कीमत आतंकियों के खून
से लिए जाएँ | जिससे देश का मान सम्मान स्वाभिमान और जवानों की कुर्बानी
बेकार ना हो | अपनी तक़रीर में जगह -जगह उलमाओं ने यह भी कहा की हम
हिन्दुस्तानी अम्न के पैकर हैं खून खराबा हमें पसंद नहीं लेकिन जब सामने
जालिम आतंकी हो तो हम सर झुकाना नहीं बल्कि सर कटाना और आतंकियों के सर
को काटना भी जानते है |

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