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जीव व भगवान के विशुद्ध मिलन का नाम है महारासः स्वामी अंकितानन्दय

जौनपुर। जीव व भगवान के विशुद्ध मिलन का नाम ही महारास है। रास पंचाध्यायी ही श्रीमदभागवत कथा का प्राण है। गोपियां ही इस महारास की अधिकारी हैं। भूत भावन भगवान भोले शंकर को भी इसमें भाग लेने के लिये गोपी का रूप धारण करना पड़ा था। उक्त विचार मुंगराबादशाहपुर नगर के मध्य स्थित सिद्धपीठ श्री महाकाली जी मंदिर के प्रांगण में समाजसेवी शंकर लाल जायसवाल के पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भक्तों को के बीच स्वामी अंकितानन्द जी महाराज ने व्यक्त किया। कथा में मुख्य यजमान विमला जायसवाल रहीं। इस अवसर पर अनिल जायसवाल, सुनील जायसवाल, सुशील कुमार, मनोज कुमार, कृष्ण गोपाल जायसवाल समेत सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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