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दुआओं के कुबूल होने की रात है शबे कद्रः मौलाना महफुजुल

जौनपुर। शबे कद्र की इस्लाम में बहुत अहमियत है, क्योंकि इसी रात कुरान नाजिल किया गया। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद ने रमजान की आखिरी 10 रातों में शबे कद्र की तलाश करने का हुक्म दिया है। उन 10 रातों में से जो दो की संख्या से न काट पाये यानी ताक रातें अर्थात् शबे 19, 21, 23, 25, 27, 29 अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद ने रमजान के आखिरी अशरे यानी 21 से 30 रमजान तक मस्जिदों में एतेकाफ करने वालों की दुआओं के कुबूल होने की बात कही। उक्त बातें नगर के शिया जामा मस्जिद के मुतवल्ली/प्रबंधक शेख अली मंजर डेजी द्वारा आयोजित शबे कद्र की विशेष नमाज के बाद इमामे जुमा मौलाना महफुजुल हसन खां ने कही। इस दौरान उन्होंने शबे कद्र के महत्व पर प्रकाश डाला जिसके बाद कुरान की खास सुराओं की तिलावत किया। इस अवसर पर शाजान, हादी खां, तालिब रजा, शकील एडवोकेट, अहमद, हाशिम खां, समीर अली, तकी हैदर, अली औन, अदनान हुसैन, मुनीर, ए एम डेजी सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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