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गोवंशों को बेसहारा/निराश्रित न छोड़ने की अपील

जौनपुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. विरेन्द्र सिंह ने बताया कि वर्तमान में देखा जा रहा है कि पशुपालक गाय पालते हैं, गाय जब तक दूध देती है तो उसे घरों में रखते हैं परन्तु जैसे ही दूध देना बंद करती है तो उसे निराश्रित/बेसहारा छोड़ देते हैं। इसके अलावा भी कुछ लोग प्रतिदिन दूध निकालने के बाद अपनी गायों को खुला छोड़ देते हैं। इसी प्रकार ज्यादातर गोपालक गाय से पैदा हुये नर बछड़ों एवं सांड़ को भी निराश्रित/बेसहारा छोड़ देते हैं। हांलाकि यही गोवंश बाद में हमारे कृषकों की जहां फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं कई बार सड़कों सहित अन्य रास्तों पर दुर्घटना का कारण भी बनते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिये शासन की मंशानुरूप इस निराश्रित गोवंश को सुरक्षित करने हेतु जनपद के 21 विकास खण्डों में अब तक 21 अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाये गये हैं जिनमें कुल 1899 निराश्रित/बेसहारा गोवंश संरक्षित हैं। उनके भरण-पोषण हेतु शासन द्वारा अनुमन्य 30 रूपये प्रति पशु की दर से सम्बन्धित विकास खण्ड के खण्ड विकास अधिकारी को आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया जाता है और सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी अपने क्षेत्र की गोशाला के संचालनकर्ता समिति (ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी) को बैंक खाते में भुगतान करते हैं और प्राप्त धनराशि का व्यय विवरण भी देते हैं। कुल 1901 गोवंश सरंक्षित हैं तथा 24 स्थानों के लिये 8218490 रूपये दी गयी है। उन्होंने बताया कि अभी तक बक्शा के उमरछा, सुजानगंज के देवकली एवं मुफ्तीगंज के कटका घुरहूपुर में संचालित नहीं किया गया है। भविष्य में अपने गोवंश को बेसहारा/निराश्रित न छोडे़ं जिससे किसानों को परेशानी का सामना न करना पडे़।

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