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दुनिया और आखरत में वही कामयाब है जो परवरदिगार की मर्जी से जिंदगी बसर करें : मौलाना असलम रिज़वी

पुणे। मरकज़—ए—ज़हरा कुण्डवा के सदस्य सैय्यद हेलाल कमर के पिता व फुटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे मरहूम सैयद इकबाल क़मर की 40वें के इसाले सवाब की मजलिस हुई।
मजलिस को खेताब करते हुए मौलाना सैय्यद मोहम्मद असलम रिज़वी (रईसे शिया उलमा बोर्ड महाराष्ट्र) ने कहा कि वही इंसान दुनिया और आखरत में कामयाब है, जो अपने परवरदिगार की मर्ज़ी के मुताबिक़ ज़िन्दगी बसर करें। मजलिस को जारी रखते हुए मौलाना ने फरमाया कि इंसान दो चीजों से मिलकर बना है, एक रूह और दूसरा जिस्म। रूह आलमे अरवाह से आती है और जिस्म इसी दुनिया से इसलिए जिस्म बीमार पड़े तो उसका इलाज यहां के डॉक्टर करते है और जब रूह बीमार पड़े तो उसका इलाज वहां के तबीब के पास होता है।
मौलाना ने कहा कि इस ज़माने में रूह के इलाज का सबसे बेहतर जरिया क़ुरान—ए—करीम है, आज हमारे दरमियान जो रूहानी मरीज़ की तादात बढ़ रही है उसकी वजह ये है कि हमने इलाही डॉक्टर और इलाही किताब (क़ुरान) से दूरी अख़्तियार कर ली है।
अगर मुसलमान चाहता है कि उसे पूरी दुनिया में इज्ज़त और बुलंदी हासिल हो तो उसे चाहिए की कुरान और अहलेबैत की तालीम को अपनाएं।
इससे पूर्व असगर, तनवीर हसनैन, दिलबर, साहिल  और अबुजर ईरानी ने पेशखनी कर ताजीयत पेश की। इस मौके पर हेलाल क़मर ने आए हुए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया और रजा सिर्सिवी की गमगीन नज़्म को पढ़कर माहौल गमगीन कर दिया।
इस मौके पर मौलाना वजीर हसन, मौलाना सैफ सहित सैकड़ों अजादारों ने अपनी ताज़ियत हेलाल कमर को पेश किया। वॉलिंटियर्स मरकज—ए—ज़हरा की तरफ से तहसीन अब्बास, फ़िरोज़  हैदर, शमीम हैदर, इमरान हैदर, गुड्डू अंसारी, अली कनानी, सफीर हुसैन, सामी हैदर, सैफी रिज़वी, आबिद बेलगिरामी, सैय्यद जीशान, माजिद रिज़वी, समीर भोजानी, अज़मी रज़ा, सै. रज़ा ने पुरस दिया। मजलिस के बाद नियाज़—ए—इमाम हुसैन हुआ और सुरेहे फातेहा पढ़कर मरहूम को बख्शा गया।

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