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बात मान ली जाय, अन्यथा मूल्यांकन कार्य से विरत रहेंगे शिक्षकः रमेश सिंह

जौनपुर। कोरोना वायरस की इस भयंकर आपदा जिसमें देश एवं प्रदेश सरकार हर दिन संक्रमित होने वालों की संख्या सहित इससे होने वाली मौत के आकड़ों में लगतार वृद्धि की ही सूचना दे रही हो लेकिन इस संकटपूर्ण माहौल में उपमुख्यमंत्री/शक्षा मंत्री द्वारा केवल अपनी जिद को पूरा करने और अवकाशप्राप्त शिक्षक नेताओं (जिनका मूल्यांकन कार्य अथवा शिक्षण कार्य से दशकों पूर्व से कोई लेना-देना नहीं है) की सलाह को प्रदेश के लाखों माध्यमिक शिक्षकों पर जबरन थोपते हुये 25 अप्रैल से मूल्यांकन कार्य शुरू कराने को कह दिया गया है। उक्त बातें माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति के कही। साथ ही इसे सरकार की हठधर्मिता और शिक्षकों की जान जोखिम में डालने वाला कदम बताते हुये श्री सिंह ने मंत्री को पत्र लिखकर वर्तमान परिवेश में मूल्यांकन कार्य शुरू न कराने की मांग किया। लॉक डाउन की अवधि में यातायात के साधनों के अभाव, मूल्यांकन केन्द्रों पर परीक्षकों की बड़ी संख्या के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न हो पाने, कुछ विषयों की उत्तरपुस्तिका एक से अधिक परीक्षकों के हाथों जाने, एवार्ड ब्लैंक पर कई परीक्षकों द्वारा नम्बर चढ़ाने, मूल्यांकन केन्द्रों पर महामारी से लड़ने हेतु आवश्यक संसाधनों का अभाव आदि कारणों को गिनाते हुये शिक्षक नेता श्री सिंह ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में भी पत्र लिखकर लॉक डाउन समाप्त होने तक मूल्यांकन कार्य न कराने की मांग की जा चुकी है। हम शिक्षक साथियों द्वारा सरकार को आश्वस्त किया जाता है कि जैसे ही संकट कम हो जायेगा, मूल्यांकन कार्य का दैनिक समय बढ़ाते हुये न केवल हम शीघ्र ही मूल्यांकन कार्य सम्पन्न कर लेंगे, बल्कि शिक्षण कार्य भी अतिरिक्त समय लेकर और आगामी छुट्टियों में विद्यालय खोलकर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्र हित हमारी शीर्ष प्राथमिकता है लेकिन यदि इसके बावजूद सरकार शिक्षकों की जान जोखिम में डालकर 25 अप्रैल से ही मूल्यांकन कार्य पर आमादा रही तो हम शिक्षक ‘जान है तो जहान है’ पर अमल करते हुये मूल्यांकन कार्य से विरत रहेंगे जिसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व विभाग पर होगा।

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