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भाजपा नेत्री उषा मौर्या सहित पांच के विरुद्ध फ्राड का मुकदमा दर्ज करने का आदेश,

जौनपुर। दीवानी न्यायालय ने वादिनी निर्छला मौर्य के प्रार्थना पर आईपीसी की धारा 156 (3) के तहत भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री उषा मौर्या सहित पांच लोंगो के खिलाफ थाना लाइन बाजार में फ्राड के विभिन्न धाराओं में तीन दिन के अन्दर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। 
        मिली खबर के अनुसार निर्छला देवी ने सीजेएम की कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र देते हुए कहा कि प्रार्थिनी के ससुराल पचहटिया में कीमती जमीन थी जिसे कूट रचना करते हुए उषा मौर्य ने बेच डाला है।
     निर्छला देवी ने प्रार्थना पत्र में कहा कि उसके ससुर खदेरन मौर्य थे जिसके नाम जमीन थी। निर्छला के अनुसार खदेरन मौर्य के जीवित रहते उसके पति की मौत हो गयी थी, पति की मौत के कुछ समय बाद ससुर खदेरन की भी हत्या कर दी गयी। इस तरह खदेरन मौर्य की मौत के बाद जमीन की वारिस बहू निर्छला और पौत्र पंकज वारिस हुए और सरकारी अभिलेख में नाम भी दर्ज हो गया। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थित खराब होने के कारण जमीन को दिलीप प्रजापति के नाम रजिस्ट्री कर दिया था। 
        दूसरी ओर उषा और उनकी बहन निर्मला ने कार्यवाही करते हुए तहसील दार सदर के आदेश से निर्छला और पंकज का नाम खारिज करा के अपना नाम दर्ज करा लिया था लेकिन एसडीएम के अपील होने पर तहसील दार की आदेश स्थगित कर दिया गया। फिर उषा मौर्या एसडीएम के आदेश के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट गयी वहां पर उषा बनाम निर्छला और उषा बनाम दिलीप दो मुकदमा किया। कमिश्नर ने 
तहसीलदार के आदेश को बहाल कर दिया तो मामला हाईकोर्ट बोर्ड आफ रेवन्यू पहुंच गया जहां पर आज भी विचाराधीन है।
     हाईकोर्ट ने एसडीएम के वारिस आदेश को माना है। 
दूसरी ओर उषा देवी भाजपा महिला मोर्चा के प्रदेश महामंत्री की हनक दिखा कर 65 विस्वा जमीन को कूट रचना करते हुए मनोज राय और पंकज मौर्य के सहयोग से बेंच दिया। जानकरी होने पर निर्छला और विपक्षी गण थाना लाइन बाजार पर तहरीर दिये लेकिन सत्ता के दबाव में कार्यवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़िता कोर्ट की शरण में गयी।

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